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उत्तराखंड के जंगलों में एआई की एंट्री, शुरू हुआ तकनीक का नया दौर, जानिये कैसे होगा काम

हल्द्वानी वन प्रभाग के नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में अकूस्टिक रिकॉर्डर लगाये गये हैं. जिसके जरिये केवल आवाज से ही पक्षियों की प्रजाति पहचान होगी.

हल्द्वानी: उत्तराखंड के जंगलों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री हो चुकी है. हल्द्वानी वन प्रभाग ने पहली बार नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में अकूस्टिक रिकॉर्डर लगाए हैं. ये डिवाइस पक्षियों की आवाज रिकॉर्ड कर AI की मदद से उनकी प्रजाति की पहचान कर रहे हैं. शुरुआती ट्रायल में ही 140 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां चिन्हित होने से वन विभाग उत्साहित है.

उत्तराखंड में वन्यजीव और पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में तकनीक का नया अध्याय शुरू हो गया है. हल्द्वानी वन प्रभाग ने पहली बार नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में अत्याधुनिक अकूस्टिक रिकॉर्डर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का प्रयोग शुरू किया है. जंगलों में लगाए गए ये विशेष ध्वनि रिकॉर्डर चौबीसों घंटे पक्षियों की आवाजों को रिकॉर्ड करते हैं.

रिकॉर्ड की गई ध्वनियों का विश्लेषण AI आधारित सॉफ्टवेयर के जरिए किया जाता है. यह आवाज का मिलान अपने डेटाबेस से कर संबंधित पक्षी की प्रजाति की पहचान करता है. इस तकनीक की खास बात यह है कि पक्षियों को देखे बिना केवल उनकी चहचहाहट के आधार पर उनकी मौजूदगी दर्ज की जा सकती है.

नंधौर वन्यजीव अभयारण्य देशी और विदेशी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास माना जाता है. यहां हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं. ऐसे में यह तकनीक दुर्लभ और कम दिखाई देने वाली प्रजातियों की पहचान और संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगी.

हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार के अनुसार, नंधौर में इस तकनीक का एक सप्ताह का ट्रायल किया गया. जिसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे. केवल सात दिनों में ही 140 से अधिक विभिन्न पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई है. यह आंकड़ा क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को भी दर्शाता है. वन विभाग अब इस परियोजना का विस्तार करने की तैयारी में है.
हल्द्वानी वन प्रभाग की सभी पांच रेंजों में अकूस्टिक रिकॉर्डर लगाए जाएंगे. जिससे पक्षियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा. विभाग का मानना है कि भविष्य में यह डेटा वन्यजीव अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय बदलावों को समझने में बेहद उपयोगी साबित होगा.
क्या होता है अकूस्टिक रिकॉर्डर: अकूस्टिक रिकॉर्डर को जंगल में पेड़ों पर लगाया जाता है. अकूस्टिक रिकॉर्डर एक हाईटेक उपकरण होता है. इसके जरिये जंगल में पक्षियों का आवाजें 24 घंटे रिकॉर्ड की जाती हैं. जिसके बाद पक्षियों की आवाजों को एनालिसिस की जाती है.

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