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उत्तराखंड में मानसून के लिए सरकार अलर्ट, रोबोट तैनात, छुट्टियां कैंसिल, 120 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन हैं चुनौती

उत्तराखंड में कुल 34,421 किलोमीटर लंबाई की सड़कें हैं, प्रदेश भर में 120 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन चिन्हित

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून सीजन को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सड़क संपर्क बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी करने का दावा किया है. राज्य में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान से लेकर मशीनों और मानव संसाधनों की तैनाती तक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है. मानसून के लिए रोबोट तैनात किए गए हैं तो कर्मचारियों की छुट्टियां कैंसिल हैं.

मानसून को लेकर पहले ही अलर्ट मोड पर सरकार: उत्तराखंड में मानसून 2026 के दौरान आपदा और सड़क अवरोध की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के सभी संबधित विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं. राज्य आपदा प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग ने अपनी तैयारियों का ब्यौरा पेश किया, जिसमें सड़कों को सुचारू रखने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों की तैनाती की जानकारी दी गई.

पीडब्ल्यूडी के अंडर हैं 7,918 सड़कें: आपको बता दें कि प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अधीन कुल 7,918 सड़कें हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 34,421 किलोमीटर है. यदि इन में BRO, NHAI और NHIDCL की सड़कों को भी शामिल किया जाए, तो राज्य में सड़क नेटवर्क 35,940 किलोमीटर तक पहुंच जाता है. पहाड़ी राज्य होने के कारण मानसून के दौरान इन मार्गों को चालू रखना सरकार की एक बड़ी चुनौती मानी जाती है. वो भी तब जब प्रदेश में चारधाम यात्रा चल रही हो.

प्रदेश भर में 120 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन चिन्हित: मानसून सीजन शुरू होने से पहले उत्तराखंड में भूस्खलन को लेकर खतरे की घंटी बज चुकी है. लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा तैयार “क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन-2026” रिपोर्ट में राज्यभर के 120 ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है, जहां हर वर्ष बारिश के दौरान सड़कें बंद होने और यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आती हैं. रिपोर्ट में कई राष्ट्रीय राजमार्ग, चारधाम यात्रा मार्ग और ग्रामीण सड़कें भी शामिल हैं.

मानसून सीजन के लिए 685 मशीनों तैनात की गई हैं (ETV Bharat Graphics)

विभागीय सचिव पंकज पांडे ने बाताया कि-

हाल ही में लोक निर्माण विभाग ने संवेदनशील और क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन को लेकर लेटेस्ट सर्वे करवाया गया जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों पर 57 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए हैं. राज्य मार्गों, जिला मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर ऐसे 120 जोन मौजूद हैं. BRO, NHAI और NHIDCL के अंतर्गत आने वाले मार्गों पर भी 22 संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं.
-पंकज पांडे, सचिव, पीडब्ल्यूडी-

इन जिलों में हैं क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन: PWD की इस रिपोर्ट के अनुसार अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और देहरादून जिलों में क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं. इन स्थानों पर लगातार भूस्खलन होने के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. नैनीताल जिले में सबसे अधिक संवेदनशील स्थानों में नैनीताल-कालाढूंगी मोटर मार्ग, नैनीताल-भवाली मार्ग और नैनीताल बाईपास शामिल हैं. वहीं रामनगर-बेतालघाट और गर्जिया-बेतालघाट मार्गों पर भी कई सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं.

चारधाम यात्रा मार्ग पर क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के स्थाई उपचार के लिए 11.84 करोड़ की डीपीआर: चारधाम यात्रा से जुड़े मार्ग भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं. रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा-जाल चौमासी मोटर मार्ग पर कई स्थानों को क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन घोषित किया गया है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन स्थलों के स्थायी उपचार के लिए तकनीकी एजेंसियों के साथ DPR तैयार की जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत 11.84 करोड़ रुपये बताई गई है.

इन मार्गों के लिए तैयार हो रही डीपीआर: इसी तरह से चमोली जिले में रुद्रप्रयाग-पोखरी मोटर मार्ग, पोखरी-हरिशंकर मार्ग और नंदप्रयाग-घाट-सुतोल-कनोल मोटर मार्ग के कई हिस्सों को भी संवेदनशील माना गया है. कुछ स्थानों पर उपचार कार्य चल रहा है, जबकि कई जगह विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है. उत्तरकाशी में सिलक्यारा-बंगांव-छपरा-सरोत मोटर मार्ग, उत्तरकाशी बाईपास और हर्षिल-मुखवा मार्ग भी लैंडस्लाइड जोन की सूची में शामिल हैं. वहीं देहरादून जिले में मसूरी रोड, सहस्त्रधारा-चामासारी मार्ग, कालसी-चकराता मार्ग और चकराता क्षेत्र की कई सड़कें भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील पाई गई हैं.

मानसून से पहले 685 मशीनें और 4023 कर्मी तैनात: मानसून सीजन में सड़क संपर्क बनाए रखने के लिए आपदा प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश भर में मशीनों और मानव संसाधनों की तैनाती कर दी है. विभाग के आंकड़ों के मुताबिक भूस्खलन और सड़क बंद होने की स्थिति से निपटने के लिए 685 मशीनें और 4023 कर्मी मैदान में रहेंगे. मानसून के दौरान सड़कें जल्द खोलने के लिए विभाग ने बड़े पैमाने पर मशीनों और मानव संसाधनों की तैनाती की है.

मानसून से पहले 685 मशीनें और 4023 कर्मी तैनात (File Photo- ETV Bharat)

विभाग के पास कुल 685 मशीनें उपलब्ध हैं, जिनमें 589 जेसीबी, 73 पोकलेन, 14 डोजर और 9 रोबोट शामिल हैं. इसके अलावा 4,023 श्रमिकों की भी तैनाती की गई है, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके. सचिव आपदा प्रबंधन विनोद सुमन के अनुसार-

राज्यभर में सड़क अवरोध और भूस्खलन से निपटने के लिए 685 मशीनों के साथ 4023 कर्मियों की तैनाती की गई है. मानसून के दौरान पहाड़ी जिलों में अक्सर सड़कें बंद होने की घटनाओं को देखते हुए यह तैयारी बेहद अहम मानी जा रही है. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल 589 जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं, जो मलबा हटाने और सड़क खोलने का सबसे बड़ा साधन होंगी. इसके अलावा 73 पोकलेन मशीनें, 14 डोजर, 17 कंप्रेसर, 155 टिप्पर, 79 डम्पर और 25 वुड कटर भी विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर उपलब्ध कराए गए हैं.
-विनोद सुमन, सचिव आपदा प्रबंधन-

मशीनों के साथ कर्मचारियों की मानसून ड्यूटी: जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो पौड़ी जिले में सबसे अधिक 203 श्रमिक तैनात किए गए हैं. उत्तरकाशी में 167, देहरादून में 120, चमोली में 113 और रुद्रप्रयाग में 91 कर्मी तैनात हैं. अल्मोड़ा में 85, बागेश्वर में 58 और हरिद्वार में 40 श्रमिक तैनात किए गए हैं. मशीनों की उपलब्धता के लिहाज से टिहरी जिला सबसे आगे दिखाई देता है. यहां 69 जेसीबी समेत कुल 72 मशीनें उपलब्ध हैं. पौड़ी में 60 जेसीबी और 61 मशीनें, जबकि देहरादून में 37 जेसीबी और कुल 40 मशीनें तैनात की गई हैं. उत्तरकाशी में भी 30 मशीनें और 167 कर्मी मानसून ड्यूटी पर रहेंगे.

पीडब्ल्यूडी के साथ ये एजेंसियां भी हैं अलर्ट: हिमालयी क्षेत्रों में सड़क संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ PWD तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार BRO, NHAI और NHIDCL ने भी अपने स्तर पर संसाधनों की तैनाती की है. इन एजेंसियों के पास अतिरिक्त मशीनें और श्रमिक उपलब्ध हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई के लिए लगाया जाएगा. आंकड़ों के अनुसार लोक निर्माण विभाग के पास स्वयं 565 मशीनें और 1428 श्रमिक हैं. जबकि BRO, NHAI और NHIDCL के संसाधनों को जोड़ने पर यह संख्या बढ़कर 685 मशीनें और 4023 श्रमिकों तक पहुंच जाती है. इससे स्पष्ट है कि मानसून के दौरान सड़क संपर्क बहाल रखने के लिए विभाग ने बहु-एजेंसी रणनीति अपनाई है.

376 वैकल्पिक मार्ग चिन्हित, 54 बैली ब्रिज और 4 फोल्डिंग ब्रिज भी स्टेंडबाई पर: रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 13 ट्रॉली ब्रिज, 54 बैली ब्रिज और 4 फोल्डिंग ब्रिज भी उपलब्ध हैं, ताकि आपदा की स्थिति में वैकल्पिक संपर्क स्थापित किया जा सके. वहीं 9 रोबोट भी तैनात किए गए हैं, जिनका उपयोग विशेष परिस्थितियों में किया जाएगा.

चारधाम के लिए विशेष इंतजाम: चारधाम यात्रा को देखते हुए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं. केदारनाथ, यमुनोत्री, कैलाश मानसरोवर यात्रा और हेमकुंड साहिब मार्गों पर संचार व्यवस्था मजबूत करने के लिए 14 वॉकी-टॉकी सेट उपलब्ध कराए गए हैं. विभाग ने सड़क बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों की भी पहचान की है. रिपोर्ट के अनुसार 1,199 मार्गों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए 376 वैकल्पिक मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जबकि अतिरिक्त 39 अन्य वैकल्पिक मार्ग भी तैयार रखे गए हैं. आपात स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने 54 बैली ब्रिज और 4 फोल्डिंग ब्रिज भी तैयार रखे हैं. साथ ही 155 टिपर, 79 डम्पर और अन्य उपकरण भी विभिन्न स्थानों पर तैनात किए गए हैं.

479 हेलीपैड तैयार, रोड क्लोजर रिपोर्टिंग ऑनलाइन सिस्टम डेवलप: आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के लिए राज्य में कुल 479 हेलीपैड का विवरण भी तैयार किया गया है. इनमें 99 स्थायी और 380 अस्थायी हेलीपैड शामिल हैं. जरूरत पड़ने पर आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पास अस्थायी हेलीपैड विकसित करने की व्यवस्था भी रखी गई है. विभाग ने सड़क बंद और खुलने की जानकारी को रियल टाइम में उपलब्ध कराने के लिए “रोड क्लोजर रिपोर्टिंग ऑनलाइन सिस्टम” भी विकसित किया है. इसके माध्यम से राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष और संबंधित एजेंसियों को लगातार अपडेट भेजे जाएंगे.

मानसून में छुट्टियां कैंसिल: साथ ही फील्ड में तैनात अधिकारियों और मशीन ऑपरेटरों को 24 घंटे उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं. मानसून अवधि में छुट्टियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. कुल मिलाकर मानसून 2026 से पहले उत्तराखंड का लोक निर्माण विभाग सड़क संपर्क बनाए रखने और आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए व्यापक तैयारी का दावा कर रहा है. हालांकि असली परीक्षा बारिश शुरू होने के बाद होगी, जब पहाड़ों में भूस्खलन और सड़क अवरोध की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

गड्ढा मुक्त सड़क अभियान, लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन: उत्तराखंड सरकार द्वारा मानसून के आगमन से पहले प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान युद्ध स्तर पर चलाया गया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि बारिश शुरू होने से पहले क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाए. वहीं PWD सचिव पंकज कुमार पांडे से मिली जानकारी के मुताबिक-

सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए 15 मई तक कार्य किया गया है. अल्मोड़ा क्षेत्र में अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम नहीं हो पाया. इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है. मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि बारिश के बाद भी क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को ठीक किया जाए, जिसके लिए 15 सितंबर से 30 अक्टूबर तक गड्ढा मुक्त के लिए दोबारा कार्य शुरू किया जाएगा
-पंकज पांडे, सचिव, पीडब्ल्यूडी-

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