कश्मीरी इनोवेटर्स ने बनाया भारत का पहला ट्राई-हाइब्रिड स्कूटर ‘SHE’, सोलर-इलेक्ट्रिक-पेट्रोल तीनों से चलेगा

कश्मीर के बिलाल अहमद मीर और बिनिश गुलज़ार ने सोलर, बिजली और पेट्रोल से चलने वाला भारत का पहला ट्राई-हाइब्रिड स्कूटर ‘शी’ पेश किया है.
श्रीनगर: कश्मीर के दो इनोवेटर्स ने भारत का पहला ट्राई-हाइब्रिड थ्री-व्हीलर स्कूटर पेश किया है, जिसका नाम ‘शी’ (SHE) रखा गया है. इस स्कूटर की सबसे खास बात है कि यह सोलर एनर्जी, बिजली और पेट्रोल तीनों से चलता है. इस स्कूटर को बनाने का मकसद पारंपरिक चार्जिंग सिस्टम और फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता को कम करना है.
इस स्कूटर को बनाने वाले कश्मीर के दो लोगों के नाम बिलाल अहमद मीर और बिनिश गुलज़ार हैं. इन दोनों ने इसे अपनी कंपनी बिलाल्स इनोवेटिव सोलर ऑटोमोबाइल (BISA) के तहत बनाया है. मीर ने बताया कि वो पिछले 15 साल से ग्रीन एनर्जी पर काम कर रहे हैं और इससे पहले वो भारत की पहली हाई-टेक सोलर कार बना चुके हैं, जिसके लिए उन्हें छह पेटेंट भी मिले हैं.
उन्होंने कहा कि रोज़ाना के ट्रैफिक जाम, महंगे पेट्रोल और आम लोगों खासकर महिलाओं और दिव्यांगजनों की आवाजाही की दिक्कतों को देखते हुए उन्होंने इस स्कूटर का आइडिया सोचा था.
REES तकनीक और तीन तरह की पावर का मेल
कंपनी ने बकाया कि इस स्कूटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी पेटेंट टेक्नोलॉजी REES यानी Range Elevated Electric Scooter है. मीर का दावा है कि यह टेक्नोलॉजी किसी भी व्हीकल में लगाई जा सकती है और यह पूरी तरह बाहरी चार्जिंग पर निर्भर नहीं होती, क्योंकि सोलर एनर्जी से बैटरी अपने आप चार्ज होती रहती है.
उनके मुताबिक, जब सूरज की रोशनी उपलब्ध नहीं होती, जैसे श्रीनगर-जम्मू के बीच टनल में सफर के दौरान या खराब मौसम में अक्सर सूरज की रोशनी काफी कम होती है. ऐसे परिस्थिति में पेट्रोल इंजन अपने आप ऑन हो जाता है और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को चार्ज करता रहता है, जिससे स्कूटर की परफॉर्मेंस पर कोई असर नहीं पड़ता. मीर का कहना है कि इस इनोवेशन को पेटेंट मिल चुका है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली है.
स्कूटर में ऑटोमोटिव इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) टेक्नोलॉजी को भी शामिल किया गया है, जिसमें सेंसर, GPS और क्लाउड-बेस्ड सॉफ्टवेयर के ज़रिए रियल-टाइम वीइकल मॉनिटरिंग और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस जैसे फीचर्स मिलते हैं. मीर ने इसका पूरा क्रेडिट अपनी बिज़नेस पार्टनर बिनिश गुलज़ार को दिया, जिन्होंने IT में ग्रेजुएशन किया है और स्कूटर का पूरा सॉफ्टवेयर सिस्टम तैयार किया है.
दिव्यांगों और गिग वर्कर्स के लिए खास डिज़ाइन
शी (SHE) आम स्कूटर्स से काफी अलग है. इसे सामान्य इंसानों के साथ-साथ दिव्यांगों के लिए भी बनाया गया है. इसमें एक डिटैचेबल और इलेक्ट्रिकली ऑपरेटेड सीट दी गई है, जिसे स्विच के ज़रिए ऊपर-नीचे किया जा सकता है.
मीर ने बताया कि सीट हटाने पर यह सामान्य बाइक बन जाती है, जबकि दिव्यांग राइडर के लिए सीट पूरी तरह इलेक्ट्रिक तरीके से ऊपर-नीचे होकर चढ़ने-उतरने में आसानी देती है.
इस स्कूटर में करीब 200 किलोग्राम तक सामान लेकर जाने की क्षमता वाला स्टोरेज स्पेस भी दिया गया है. इससे यह फूड डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स के लिए भी उपयोगी हो सकता है. मीर का कहना है कि यह KFC, Zomato और Dominoz जैसी कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर्स के लिए खासतौर पर काफी मददगार साबित हो सकता है.
मीर ने यह भी बताया कि उन्होंने अभी तक इस स्कूटर को किसी ऑटोमोबाइल कंपनी को नहीं दिखाया है, क्योंकि टीम इसे अपनी कंपनी BISA के ज़रिए खुद ही बाज़ार में उतारना चाहती है.
वहीं, बिनिश गुलज़ार ने कहा कि यह स्कूटर कंपनी के बड़े विज़न का सिर्फ एक हिस्सा है. उन्होंने बताया कि BISA कंपनी मोबिलिटी से लेकर कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स तक सोलर-पावर्ड इनोवेशन का पूरा इकोसिस्टम बनाना चाहती है, ताकि फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता को कम किया जा सके.
SHE की लॉन्चिंग मीर की उस ग्रीन मोबिलिटी यात्रा की एक और कड़ी है, जो 2009 में सस्ती सोलर कार बनाने के सपने से शुरू हुई थी. अपनी पैतृक संपत्ति का हिस्सा बेचकर और करीब 22 लाख रुपये लगाकर मीर ने सोलर कार RAY तैयार की थी. RAY कार में 1 किलोवाट का सोलर पावर सिस्टम, ऑटोनॉमस पार्किंग सेंसर, म्यूज़िक-रिस्पॉन्सिव रियर लाइटिंग और सोलर पैनल वाले गल-विंग दरवाज़े दिए गए हैं.मीर ने बताया कि अगस्त में महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरपर्सन आनंद महिंद्रा के साथ सोलर कार प्रोजेक्ट को लेकर एक अहम बैठक होनी है. उन्हें उम्मीद है कि इस मीटिंग में उनकी यह सोलर कार जल्द सोलर ऑटोमोबाइल मार्केट में उतर सकेगी.




