पौड़ी हाट गांव शंकराचार्य निर्मित मंदिर की सुरक्षा पर सुनवाई, रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने टीएचडीसी से मांगा शपथ पत्र
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने संस्कृति विभाग की निरीक्षण रिपोर्ट का संज्ञान लिया![]()
नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पौड़ी गढ़वाल के हाट गांव में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा निर्मित प्राचीन मंदिर की सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने संस्कृति विभाग की निरीक्षण रिपोर्ट का संज्ञान लिया.
आदि गुरु शंकराचार्य निर्मित मंदिर की सुरक्षा पर सुनवाई: रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, पौड़ी की टीम ने 16 अक्टूबर 2025 को स्थल का निरीक्षण किया था. निरीक्षण में मंदिर के उत्तरी हिस्से में मलबे को रोकने के लिए एक और आरसीसी दीवार बनाने तथा पूर्वी दिशा में संचालित क्रशर मशीन को तुरंत हटाने की संस्तुति की गई. इसके साथ ही मंदिर के 100 मीटर के दायरे को पूरी तरह खाली रखने की सिफारिश की गई थी, ताकि ऐतिहासिक धरोहर को किसी भी नुकसान से बचाया जा सके.
4 साल पहले दायर हुई थी याचिका: यह जनहित याचिका ग्राम सभा की ओर से 2022 में दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि टीएचडीसी द्वारा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का मलबा मंदिर क्षेत्र के आसपास डाला जा रहा है, जिससे मंदिर व क्षेत्र की इकोलॉजी प्रभावित हो रही है.
टीएचडीसी से मांगा गया शपथ पत्र: मामले की सुनवाई के दौरान टीएचडीसी के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि निरीक्षण टीम द्वारा सुझाई गई आरसीसी सुरक्षा दीवार का निर्माण तत्काल कराया जाएगा. वहीं, मंदिर परिसर के 100 मीटर क्षेत्र को खाली कराने और क्रशर हटाने के सुझाव पर निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय करते हुए टीएचडीसी को अब तक उठाए गए कदमों का ब्योरा शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया है.
हल्द्वानी हत्याकांड मामले में आरोपी पार्षद अमित बिष्ट की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज: वहीं एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हत्यारोपी हल्द्वानी के पार्षद और होटल व्यवसायी अमित बिष्ट की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया.
ये था पूरा मामला: मामला 5 जनवरी 2026 का है, जब हल्द्वानी पुलिस स्टेशन में अमित बिष्ट के खिलाफ धारा 103(1) व 352 बीएनएस तथा आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. आरोप है कि कैनाल रोड स्थित आरोपी के घर के बाहर पहुंचे नितिन लोहानी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. आरोपी पक्ष की ओर से तर्क दिया गया था कि पूर्व में उनके होटल में हुई हिंसा और धमकियों के कारण उन्होंने भयभीत होकर आत्मरक्षा में गोली चलाई थी.
जमानत अर्जी इस आधार पर हुई खारिज: किंतु अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि नितिन और उसका साथी पूरी तरह से निहत्थे थे. उन्होंने घर में घुसने का कोई प्रयास नहीं किया था. अदालत ने टिप्पणी की कि आत्मरक्षा का अधिकार बिना खतरा भांपे निहत्थे व्यक्तियों पर सीधी गोलीबारी करने का लाइसेंस नहीं देता है और यह अधिकार कानून के दायरे में ही लागू होता है. राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि यह एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है. अदालत ने मामले को जघन्य मानते हुए याचिका में कोई मेरिट न पाते हुए जमानत आवेदन को खारिज कर दिया.



