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सीएचसी सेंटर में कांग्रेस MLA काजी निजामुद्दीन के हंगामे के बाद आया नया मोड़, आई ये सच्चाई सामने

मंगलौर में सीएचसी सेंटर में मरीज के फर्श पर लेटे होने के मामले में नया मोड़ आ गया है.

हरिद्वार: रुड़की के मंगलौर में सीएचसी सेंटर में विधायक काजी निजामुद्दीन के हंगामे के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के फर्श पर लेटे होने के मामले को पूर्व नियोजित बताया है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मंगलौर की ओर से जारी किए गए बयान और सीसीटीवी फुटेज मुताबिक मरीज विधायक की गाड़ी अस्पताल में घुसने से ऐन पहले ही बेंच से उठकर फर्श पर लेटा था. जबकि विधायक के अस्पताल में पहुंचने पर काफी घंटों पहले से फर्श पर लेटे होने की बात कही गई. सीसीटीवी फुटेज में भी मरीज दिलशाद विधायक काजी निजामुद्दीन के आने से ऐन पहले ही फर्श पर लेटता हुआ दिख रहा है. गौरतलब है कि मंगलौर विधायक ने बृहस्पतिवार को सीएचसी पहुंचकर व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए हंगामा किया था. जिसके बाद अब सीएमओ हरिद्वार डॉ. आरके सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है.

जानिए क्या था पूरा मामला: बीते गुरुवार को एक टीबी पीड़ित मरीज उपचार के लिए अपनी पत्नी के साथ मंगलौर स्थित सरकारी अस्पताल पहुंचा था. परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे सही उपचार नहीं दिया. वो अस्पताल के बाहर ही तड़पता रहा. मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन इसकी शिकायत की गई. इसके बाद काजी निजामुद्दीन अस्पताल पहुंचे. उन्होंने देखा कि मरीज फर्श पर लेटा हुआ तड़प रहा था.

आरोप लगाया कि अस्पताल में मौजूद स्ट्रेचर की हालत इतनी जर्जर थी कि वह इस्तेमाल के लायक भी नहीं थे. विधायक काजी निजामुद्दीन ने आरोप लगाया था कि अस्पताल के स्ट्रेचर पर गंदगी थी और डॉक्टर इलाज नहीं कर रहे थे. उन्होंने इसे मानवता को शर्मसार करने वाली घटना भी बताया था. उन्होंने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच करने की मांग की थी. साथ ही चेतावनी देते हुए कहा था कि सरकारी अस्पतालों में गरीबों के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

मामले पर क्या बोले हरिद्वार सीएमओ: सीएमओ आरके सिंह ने दावा किया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने सीसीटीवी फुटेज चेक किए तो सामने आया कि यह पूरा मामला पूर्व नियोजित था. अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में यह खुलासा हुआ है. जो मरीज लापरवाही का आरोप लगाया है वो विधायक के पहुंचने से कुछ देर पहले ही अस्पताल पहुंचा था. विधायक के पहुंचने से पहले ही वो अस्पताल में नीचे लेट गया.

उसने विधायक को भी गलत जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी उन्हें, विधायक ने भी दी थी, उनसे फोन पर बात भी हुई थी. लेकिन जब जांच कराई गई तो मरीज अस्पताल में भर्ती होने की जिद कर रहा था. टीबी के मरीज को साधारण अस्पताल में भर्ती नहीं कर सकते. इसलिए उन्हें जिले के टीबी का इलाज करने वाले सरकारी अस्पताल में जाने को कहा गया था.

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