सर्दी की दस्तक के साथ उत्तराखंड में बढ़े वन्य जीवों के हमले, कहीं हाथियों का उत्पात तो कहीं भालू-गुलदार ले रहे जान

उत्तराखंड में वन्यजीव, मवेशियों के साथ इंसानों पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं, पौड़ी में विधायक और अफसरों पर बरसे लोग, रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा
देहरादून: उत्तराखंड में मौसम बदलने और सर्दियों की दस्तक के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं. पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक जंगली जानवरों की आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पहाड़ी जिलों में तो भालू और गुलदार की आमद घरों तक हो गई है.
उत्तराखंड में बढ़ा मानव-वन्यजीव टकराव: पौड़ी गढ़वाल में गुलदार लगातार इंसानी जिंदगी पर हमला कर रहे हैं. अब घरों के आंगन तक बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है. चमोली में भालुओं का आतंक पशुपालकों के लिए मुसीबत बन रहा है. भालू जंगलों से निकलकर गौशालाओं में घुस रहे हैं और मवेशियों को मार रहे हैं. हरिद्वार में हाथियों के झुंड एक बार फिर रिहायशी इलाकों, मंदिर परिसरों और शहर से सटे क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं. बीते कुछ दिनों में सामने आई घटनाएं बता रही हैं कि मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव अब किसी एक जिले या एक इलाके तक सीमित नहीं रह गया है. लगातार पहाड़ से लेकर मैदान तक अलग अलग घटनाएं सामने आ रही हैं.
पौड़ी में बच्ची की मौत के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार का आतंक लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. जिले में शायद ही कोई महीना ऐसा गुजर रहा हो, जब गुलदार की आवाजाही या हमले की घटना सामने न आ रही हो. पिछले एक साल में पौड़ी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर के दायरे में मौजूद गांवों में गुलदार के हमले की लगभग 15 घटनाएं सामने आई हैं. इनमें 12 लोगों की जान जा चुकी है.
लगातार हो रही हमले की घटनाओं ने ग्रामीणों के भीतर डर का माहौल पैदा कर दिया है. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपने घरों के आसपास रास्तों और आंगन में भी बच्चों को अकेला छोड़ने से डर रहे हैं. मंगलवार शाम खांड्यूसैंण क्षेत्र के वजली गांव में गुलदार ने घर के आंगन में मौजूद करीब पांच वर्षीय मासूम आरुषि को अपना शिकार बना लिया. बच्ची घर के आंगन में खेल रही थी. तभी गुलदार ने अचानक धावा बोला और उसे उठाकर झाड़ियों की ओर ले गया. परिजनों और ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए बच्ची की तलाश शुरू की. बाद में उसका शव घर से कुछ दूरी पर बरामद हुआ. इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया.
गांव वालों ने विधायक को घेरा, अफसरों को बना लिया था बंधक: मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश उस समय और बढ़ गया जब स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी घटनास्थल पर पहुंचे. लोगों ने विधायक का घेराव कर उनसे लगातार हो रहे गुलदार के हमलों और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल किए. ग्रामीणों का आरोप था कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं. इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई. विरोध के दौरान विधायक के वाहन को चारों तरफ से घेर लिया गया. हालात ऐसे बने कि विधायक को काफी देर तक अपनी गाड़ी के भीतर ही रहना पड़ा. प्रदर्शन कर रही एक बुजुर्ग महिला वाहन के बोनट पर चढ़ गई और वन मंत्री सुबोध उनियाल तथा जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगी. करीब डेढ़ से दो घंटे तक क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. देर रात तक वन मंत्री पौड़ी आओ गुलदार-भालू से हमें बचाओ के नारे लोग लगाते रहे.
पौड़ी की घटना को लेकर क्या बोले अधिकारी: गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि-
वजली गांव में गुलदार के हमले में बच्ची की मौत हुई है. विभाग की टीम मौके पर भेजी गई है और घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है. गुलदार को आदमखोर घोषित करने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रस्ताव भेजा गया है. वन विभाग की ओर से क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
-महातिम यादव, डीएफओ, गढ़वाल वन प्रभाग-
इसी दौरान पौड़ी जिले के कोटद्वार क्षेत्र से भी एक बच्ची पर गुलदार के हमले की खबर सामने आई है. हालांकि उसकी मां ने साहस दिखाते हुए बच्ची को गुलदार के चंगुल से छुड़ा लिया. लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पहाड़ के गांवों में बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए मौजूदा इंतजाम पर्याप्त हैं.
हरिद्वार में हाथियों की शहर की ओर आवाजाही: पहाड़ों में गुलदार और भालू के हमलों के बीच मैदानी जिले हरिद्वार में हाथियों की आवाजाही भी चिंता का विषय बनी हुई है. राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग से सटे क्षेत्रों में हाथियों का आबादी की ओर आना कोई नई बात नहीं है. लेकिन त्योहारी सीजन में जब लोग घरों से बाहर ही हैं, ऐसे में एक के बाद एक हाथियों के आ धमकने की घटनाएं रोजाना हो रही हैं. 2 नवंबर को भेल स्टेडियम से आगे सड़क पर हाथी के पहुंचने और गोल चौराहे पर खड़े होने से लोग दहशत में आ गए.
इसके बाद 3 नवंबर को लालढांग क्षेत्र में चार हाथियों का झुंड खाकीर बाबा मंदिर परिसर में पहुंच गया. घटना सोमवार रात करीब दस बजे की है, जब हाथियों का झुंड लोगों के बीच पहुंच गया. इसी के साथ हरिद्वार के ही हरिद्वार लक्सर मार्ग पर भी तीन तारीख को हाथी गलियों में घूमता हुआ नजर आया. हरिद्वार वन प्रभाग के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया था कि-
करीब 16 से 17 हाथी ऐसे हैं, जो आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही करते हैं. विभाग इनके झुंड का नेतृत्व करने वाले हाथियों की पहचान कर रहा है. योजना के तहत चिह्नित छह हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाया जाना है, जिससे उनके मूवमेंट की जानकारी मिल सके और हाथियों के आबादी की ओर बढ़ने पर वन विभाग की टीम को समय रहते अलर्ट किया जा सके.
-स्वप्निल अनिरुद्ध, डीएफओ, हरिद्वार वन प्रभाग-
DFO ने बताया कि इस काम में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का सहयोग लिया जा रहा है. मानव हाथी संघर्ष को रोकने के लिए 75 हाथी मित्रों की तैनाती का प्रस्ताव भी जल्द धरातल पर होगा.
चमोली से लेकर उत्तरकाशी तक भालुओं का बदला व्यवहार: पौड़ी और हरिद्वार के बाद चमोली जिले में भालुओं की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है. पोखरी विकासखंड की चंद्रशिला पट्टी में भालू लगातार गौशालाओं को निशाना बना रहे हैं. बीते दिनों एरोली भिकोना और बंगथल गांव से सामने आई घटनाओं में भालुओं ने गौशालाओं की छत और दरवाजे तोड़कर अंदर बंधे मवेशियों पर हमला किया. 2 नवंबर को नंदासैंण क्षेत्र के एरोली गांव में भालू ने गौशाला की छत तोड़कर दो बैलों पर हमला कर दिया. इस घटना में एक बैल की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ.
इसी दिन भिकोना गांव में दर्शन सिंह की गौशाला में घुसकर भालू ने बैल को मार डाला. इससे पहले बंगथल गांव में भी भालू ने गौशाला में घुसकर एक बैल को मार दिया था और दूसरे को घायल कर दिया था. क्षेत्र में डुंगर, कांडई चंद्रशिला, जौरासी और किमोठा समेत कई गांवों में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ये घटनाएं लगातार एक के बाद एक घट रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है और मवेशियों की मौत से परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
लगातार जानवरों पर हमले कर रहे हैं भालू: वन्यजीवों के हमलों में पिछले वर्ष करीब 40 मवेशियों की मौत हुई थी. इस वर्ष अब तक 15 मवेशियों के मारे जाने की बात विभाग कह रहा है. ज्योतिर्मठ, पोखरी और दशोली क्षेत्र में भालुओं की सक्रियता अधिक बताई गई है. केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के अनुसार-
भालू सर्वाहारी जीव है. उसके भोजन में फल, जड़ें, घास, कीड़े-मकोड़े, छोटे स्तनधारी और मांस शामिल हैं. विभाग की ओर से भालू के व्यवहार और गतिविधियों का अध्ययन करने के साथ रेडियो कॉलर के जरिए निगरानी की योजना बनाई जा रही है. भिकोना क्षेत्र में ड्रोन की मदद से भी भालू की लोकेशन और संभावित आवास का पता लगाने का प्रयास किया गया.
-रजत सुमन, डीएफओ, केदारनाथ वन प्रभाग-
इससे पहले चमोली के नेल गांव के सिदेली तोक में 3 सितंबर को जंगल में घास लेने गई दो महिलाओं की भालू से बचने के प्रयास में खाई में गिरने से मौत हो गई थी. दिसंबर 2025 में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिशंकर में भालू के घुसने से दो छात्र घायल हुए थे.
सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा माना: उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने 25 सितंबर को इस समस्या को आपदा के रूप में मान्यता देने और जिला स्तर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण एवं प्रबंधन समितियां गठित करने का निर्णय लिया था. 8 अक्टूबर को वन्यजीव सप्ताह के समापन समारोह में राज्यपाल ने भी इस फैसले पर अपनी बात रखी थी. राज्यपाल ने कहा था कि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत और मुआवजा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय प्रभावी बनाए जाएं. वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि-
उत्तराखंड मे कहीं भी जानवर या इंसान जान गंवाता है तो ये हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय होता है. पहाड़ और मैदान में ये घटनाएं रोकने के लिए हम लगातार प्रभावी कदम उठा रहें है. पौड़ी की घटनाओं पर मैं लगातार अधिकारियों से बात कर रहा हूं.
-सुबोध उनियाल, वन मंत्री, उत्तराखंड-




